CDS विपिन रावत की मौत कहीं साजिश तो नहीं ?


सीडीएस,जनरल बिपिन रावत की मौत के पीछे भारत में सक्रिय डिफेंस लॉबी की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। राफेल डिफेंस डील के बाद से ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि भारत में सक्रिय डिफेंस लॉबी कितनी ताकतवर हैं और सिस्टम में कितनी गहराई तक घुसी हुई हैं। जनरल रावत की मौत कहीं से सामान्य नहीं लगती। रूस के राष्ट्रपति, पुतिन का दौरा ख़तम होने के तुरंत बाद ही हादसा हुआ. क्यूं? (भारत ने रूस से 2008 में 1.8 बिलियन डॉलर का रक्षा सौदा किया था जिसके तहत 80 एम आई हेलीकॉप्टर खरीदे गए). चीन से तनातानी के बीच, भारत रूस में बने मिसाइल सुरक्षा तंत्र एस 400 को तैनात करने वाला है. अमेरिका इस सौदे के सख़्त ख़िलाफ़ था. चीन भी खुश नहीं था. रावत ने हाल ही में चीन को भारत का सामरिक दुश्मन नंबर वन करार दिया था। चीन, भारत में समानांतर खुफिया तंत्र चलाता है. यह बात छिपी नहीं है अब। सवाल बहुत सारे है जिनके जवाब दिए जाने चाहिए. जिम्मेदारी सरकार की है. जनरल रावत की मौत की गहन जांच होनी चाहिए। इस हादसे का असर सिर्फ भारत के बाहरी मामलों में नहीं,अंदर भी होगा. इसलिए जितनी पारदर्शिता होगी, भारत के लिए उतना ही अच्छा होगा।

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